मानव व्यवहार का एक बहुत महत्वपूर्ण नियम है। अगर हम उस नियम का पालन करेंगे तो हम कभी मुश्किल में नहीं फँसेंगे। वास्तव में अगर हम उस नियम पर चलेंगे तो हमारे पास अनगिनत दोस्त होंगे और हम हमेशा खुश रहेंगे। परंतु जिस पल हम उस नियम को तोड़ेंगे, उसी पल से हम बहुत सारी मुश्किलों में फँस जाएँगे।
यह नियम है, हमेशा दूसरे व्यक्ति को महत्वपूर्ण अनुभव कराओ ! जॉन ड्यूई ने कहा है कि "महत्वपूर्ण बनने की इच्छा मानव स्वभाव की सबसे महत्वपूर्ण इच्छा होती है।" विलियम जेम्स ने कहा है कि 'हर मनुष्य की दिल की गहराई में यह लालसा छुपी होती है कि उसे सराहा जाए।' यही लालसा मानव सभ्यता के विकास का कारण है।
आप चाहते हैं कि आपसे मिलने-जुलने वाले लोग आपकी तारीफ करें...... आप चाहते हैं कि आपकी प्रतिभा को पहचाना जाए....... आप चाहते हैं कि आप अपनी छोटी-सी दुनिया में महत्वपूर्ण बनें...... आप सस्ती
चापलूसी या झूठी तारीफ नहीं सुनना चाहते, परंतु आप सच्ची प्रशंसा अवश्य सुनना चाहते हैं। आप चाहते हैं कि आपके मित्र और सहयोगी आपकी दिल खोलकर तारीफ करें और मुक्तकंठ से सराहना करें! हम सभी यह चाहते हैं। इसलिए हमें इस स्वर्णिम नियम का पालन करना चाहिए और दूसरों को वही देना चाहिए, जो हम उनसे अपने लिए चाहते हैं।
दिल जीतने का अचूक तरीका किसी कुशल तरीके उन्हें यह जतला देना है कि आपको उनके महत्व का एहसास है और आप इसे सचमुच स्वीकार करते हैं। कई लोगों की जिंदगी शायद बदल जाए अगर कोई उन्हें यह अनुभव करा दे कि वे महत्वपूर्ण हैं।
दुनियां भर के तनाव जब जिंदगी को थका रहे हैं,
तो आओ …….
Friday, July 16, 2010
Saturday, July 10, 2010
Saturday, October 4, 2008
Anadi Lekhak
गीत, कविता, लेख, व्यंग्य,
मै कुछ लिखता नही,
वे तो,
ख़ुद-ब-ख़ुद,
चुपके से,
मेरे मस्तिष्क मै आती है,
और,
न जाने कब,
हाथ से होती हुई,
लेखनी से कागज़ पर उतर जाती है।
मै कुछ लिखता नही,
वे तो,
ख़ुद-ब-ख़ुद,
चुपके से,
मेरे मस्तिष्क मै आती है,
और,
न जाने कब,
हाथ से होती हुई,
लेखनी से कागज़ पर उतर जाती है।
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